उत्तराखंड : मुस्लिम फेरीवाले का नाम पूछकर भगाया, दोबारा आने पर धमकी, पुलिस ने शुरू की जांच

उत्तराखंड : मुस्लिम फेरीवाले का नाम पूछकर भगाया, दोबारा आने पर धमकी, पुलिस ने शुरू की जांच

हरिद्वार:  धर्मनगरी हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में एक मुस्लिम फेरीवाले के साथ कथित रूप से धार्मिक आधार पर अभद्रता और धमकी देने का मामला सामने आया है। पीड़ित फेरीवाले ने आरोप लगाया है कि एक युवक ने उसका नाम पूछकर धर्म विशेष का हवाला देते हुए गाली-गलौच की, क्षेत्र से भगाया और दोबारा आने पर धमकी भी दी। युवक ने खुद मोबाइल से इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया, जिसके बाद इंटरनेट मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित ज्वालापुर के मोहल्ला कस्साबान निवासी शान मोहम्मद है, जो करीब 40 वर्षों से कनखल सहित पूरे पंचपुरी क्षेत्र में फेरी लगाकर पुराना कचरा खरीदते और परिवार का पालन-पोषण करते आ रहे हैं। शान मोहम्मद ने कनखल थाने में तहरीर देकर बताया कि घटना के दौरान एक युवक ने उन्हें रोक लिया, नाम पूछा और उसके बाद खुद को हिंदूवादी संगठन का नेता बताते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। युवक ने उन्हें क्षेत्र से तुरंत चले जाने को कहा और दोबारा आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें युवक फेरीवाले को धमकाते और अपशब्द कहते नजर आ रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद ज्वालापुर क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय के कई लोगों ने नाराजगी जताई। पीड़ित के समर्थन में कुछ युवा कनखल थाने पहुंचे और तहरीर दी, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

इंस्पेक्टर कनखल देवेंद्र रावत ने बताया कि पीड़ित की तहरीर प्राप्त हो गई है और मामले की गहन जांच की जा रही है। वीडियो की भी जांच की जा रही है ताकि आरोपित की पहचान और घटना के पूरे विवरण का पता लगाया जा सके। पुलिस ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि जांच के बाद दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना पिछले कुछ समय से हरिद्वार में धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच आई है। हाल ही में हरकी पैड़ी पर ‘अहिंदुओं के प्रवेश निषेध’ से संबंधित पोस्टर भी सुर्खियों में रहे थे। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की जा रही हैं, जिसमें कुछ लोग इसे धार्मिक असहिष्णुता का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे व्यक्तिगत विवाद करार दे रहे हैं।

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