गांव की ध्याणियों की अनूठी पहल : मां भगवती की महिमा से गूंज रहा परसारी गांव, देवी भागवत महापुराण में उमड़ रही श्रद्धा

गांव की ध्याणियों की अनूठी पहल : मां भगवती की महिमा से गूंज रहा परसारी गांव, देवी भागवत महापुराण में उमड़ रही श्रद्धा

  • गांव की ध्याणियों की अनूठी पहल, मिट्टी से जुड़ाव का भावनात्मक रिश्ता
  • नौ दिवसीय कथा में भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का संगम

टिहरी : टिहरी गढ़वाल जनपद के जाखणीधार विकासखंड अंतर्गत स्थित परसारी गांव इन दिनों पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है। दुर्गा देवी मंदिर परिसर में 17 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा श्रवण कर रहे हैं। गांव की समस्त ध्याणियों और ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित यह धार्मिक अनुष्ठान क्षेत्र में आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बन गया है।

कलश यात्रा के साथ हुआ भव्य शुभारंभ

कथा का शुभारंभ 17 मई को वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ हुआ। महिलाओं द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्रा ने पूरे गांव को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद गणेश पूजन, मंडप प्रवेश और श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के मूलपाठ का आयोजन किया गया। मां भगवती के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा और श्रद्धालुओं ने कथा स्थल पर पहुंचकर पूजा-अर्चना में सहभागिता की।

प्रतिदिन हो रहे पूजन, कथा प्रवचन और भव्य आरती

नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन प्रातःकाल विशेष पूजन-अर्चन और देवी भागवत के मूलपाठ का आयोजन किया जा रहा है। दोपहर में कथा प्रवचन तथा सायंकाल भव्य आरती श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कथा के दौरान देवी शक्ति, धर्म, भक्ति, मानव जीवन के आदर्शों और लोककल्याण से जुड़े प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जा रहा है। भजन-कीर्तन और संगीतमय प्रस्तुति श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर रही है।

आचार्य जयप्रकाश पैन्यूली ‘राधे जी’ सुना रहे कथा

प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य जयप्रकाश पैन्यूली ‘राधे जी’ कथा व्यास के रूप में श्रद्धालुओं को देवी भागवत महापुराण का रसपान करा रहे हैं। उनकी मधुर वाणी और सरल व्याख्या श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रही है। कथा के माध्यम से वे सनातन संस्कृति, नैतिक मूल्यों और धार्मिक परंपराओं के महत्व को सरल भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे युवा पीढ़ी भी धर्म और संस्कृति से जुड़ रही है।

आचार्य जयप्रकाश पैन्यूली ‘राधे जी’ : दो दशक से धर्म प्रचार में समर्पित

वर्ष 2004 से कथा वाचन कर रहे प्रख्यात कथावाचक आचार्य जयप्रकाश पैन्यूली ‘राधे जी’ अब तक 400 से अधिक धार्मिक कथाओं का वाचन कर चुके हैं। उन्होंने श्रीमद्भागवत, शिवपुराण, विष्णुपुराण, देवी भागवत महापुराण, रामकथा और अन्य धार्मिक आयोजनों के माध्यम से देशभर में लाखों श्रद्धालुओं तक सनातन धर्म का संदेश पहुंचाया है। उनकी कथाओं की विशेषता शास्त्रीय ज्ञान, सरल भाषा और जीवनोपयोगी संदेश हैं। वे कथा के माध्यम से धर्म के साथ-साथ संस्कार, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव सेवा का संदेश भी देते हैं। यही कारण है कि उनकी कथाएं श्रद्धालुओं के बीच विशेष लोकप्रिय हैं और भक्ति के साथ समाज जागरण का भी माध्यम बन रही हैं।

गांव की ध्याणियों की अनूठी पहल

गांव की समस्त ध्याणियों ने अपनी जन्मभूमि से जुड़े रहने की एक अनूठी और प्रेरणादायी पहल शुरू की है। ध्याणियां यानी गांव की वे बेटियां, जो विवाह के बाद देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बस गई हैं, लेकिन उनके दिलों में आज भी अपने गांव की पगडंडियां, बचपन की यादें और मिट्टी की खुशबू बसी हुई है। वर्षों बीत जाने के बाद भी उनका अपने मायके और गांव से भावनात्मक रिश्ता कमजोर नहीं पड़ा है। इसी आत्मीय जुड़ाव को सहेजने के लिए सभी ध्याणियां समय-समय पर गांव के सामाजिक, धार्मिक और विकास कार्यों में सहयोग कर रही हैं। उनका मानना है कि भले ही वे भौगोलिक रूप से गांव से दूर हों, लेकिन उनकी जड़ें आज भी उसी मिट्टी में हैं, जहां उन्होंने जीवन के सबसे सुंदर पल बिताए। ध्याणियों की यह पहल न केवल गांव के प्रति उनके प्रेम और समर्पण को दर्शाती है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति, परंपराओं और जन्मभूमि से जुड़े रहने का संदेश देती है।

विद्वान आचार्यों का मिल रहा मार्गदर्शन

धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन मंडप आचार्य एवं कुलपुरोहित पंडित कान्तिराम चमोली के निर्देशन में संपन्न हो रहा है। उनके साथ आचार्य राजेन्द्र चमोली, आचार्य दिनेश रतूड़ी, आचार्य काशीराम नौडियाल, आचार्य सुमित बहुगुणा, आचार्य सुमित चमोली, आचार्य मनोज चमोली, आचार्य हरीश जोशी तथा श्री वीरेन्द्र प्रसाद पैन्यूली सहित कई विद्वान जन आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम

ग्रामवासियों का कहना है कि देवी भागवत महापुराण केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और संस्कारों से जुड़ती है। कथा के माध्यम से समाज में सद्भाव, सेवा, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश प्रसारित हो रहा है।

25 मई को होगी पूर्णाहुति और विशाल भंडारा

आयोजन समिति के अनुसार कथा का समापन 25 मई को यज्ञ पूर्णाहुति, प्रसाद वितरण और विशाल ब्रह्मभोज के साथ होगा। समस्त ध्याणियों और ग्रामवासियों ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां भगवती की कृपा से आयोजित यह महायज्ञ क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और लोककल्याण का संदेश लेकर आएगा।

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