जागरूकता व प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से ओजोन परत संरक्षण संभव है – प्रो. रजवार

जागरूकता व प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से ओजोन परत संरक्षण संभव है – प्रो. रजवार

ऋषिकेश : उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रोधौगिकी परिषद (यूकास्ट) द्वारा व पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर ऋषिकेश के मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी/ माइक्रोबायोलॉजी विभाग के तत्वावधान में विश्व ओजोन दिवस मनाया गया । जिसमें छात्र-छात्राओं के लिए वाद-विवाद व पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें विभाग व विज्ञान संकाय के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय, डोईवाला (देहरादून) के कुलपति प्रो. जीएस रजवार थे, जो कि लगभग 40 वर्षों से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित रहे है व अनेक वर्षों तक इसी परिसर में सेवारत रहे, उन्होंने बताया कि विश्व ओजोन दिवस के प्रति जागरूकता की शुरुआत 23 जनवरी 1995 को संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा में हुई थी, जब पूरे विश्व में 16 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय ओजोन दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। यह दिन मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के लागू होने की सालगिरह पर मनाया जाता है, जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया था। उन्होंने बताया कि ओजोन परत के संरक्षण के लिए वियना सम्मलेन में अनेको महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये I

ओजोन परत को बचाने के उपाय जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग व इसके प्रति जागरूकता फैलाना, ऊर्जा की बचत, हरित प्रौद्योगिकियों को अपनाना आदि पर जोर दिया और साथ ही उन्होंने परा-बैगनी किरणों के बारे में भी बताया जो कि हमारे आंखों, बालों व त्वचा व खाद्यान्न के लिए हानिकारक हैं ।

इससे पूर्व वाद-विवाद प्रतियोगिता में एमएलटी प्रथम वर्ष के छात्रों ने बाजी मारी l इसके साथ ही पोस्टर प्रतियोगिता में एमएलटी द्वितीय वर्ष की छात्रा रिंकी पांडे ने प्रथम स्थान, एमएलटी तृतीय वर्ष की छात्रा प्रियंका थापा ने द्वितीया स्थान प्राप्त किया तथा एमएस-सी माइक्रोबायोलॉजी तृतीय सेमेस्टर की छात्रा अंजलि ने तृतीय स्थान प्राप्त किया l

श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. एन के जोशी ने इस प्रकार के सामाजिक जन जागरूकता कार्यक्रमों के लिए शुभकामनाएं दी व कहा कि इस प्रकार के आयोजन से छात्रों में एक जागरूकता की भावना बढती है I

पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश के निदेशक प्रो एमएस रावत ने कहा कि ओजोन दिवस मानाने का उदेश्य छात्रों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना है उन्होंने बताया कि ओज़ोन परत, पृथ्वी की सतह से कई किमी ऊपर, समताप मंडल में उच्च ओज़ोन सांद्रता वाला एक क्षेत्र है। ओज़ोन परत एक अदृश्य ढाल की तरह काम करती है और हमें सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से बचाती है। विशेष रूप से, ओज़ोन परत हमें यूवी-बी नामक यूवी विकिरण से बचाती है, जो सनबर्न का कारण बनता है । इस ओजोन परत के क्षरण को हमें जागरूकता से रोकना है I

यूकास्ट के महानिदेशक प्रो दुर्गेश पन्त ने अपने सन्देश में बताया कि यूकास्ट का उदेश्य समाज व विशेषकर छात्रों में विज्ञान व सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता बढ़ानी है, ओजोन दिवस के सम्बन्ध में उन्होंने बताया कि ओजोन परत को बचाने के लिए सीएफ़सी (क्लोरोफ्लोरोकार्बन), हैलोजेनेटेड हाइड्रोकार्बन, और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी ओजोन-क्षयकारी पदार्थों का उपयोग कम किया जाना चाहिए। इसके लिए एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर जैसे उपकरणों का सही रखरखाव करना, ऐसे उत्पादों का कम से कम उपयोग करना जो इन पदार्थों का उत्सर्जन करते हैं, और सार्वजनिक परिवहन या पैदल चलकर वाहनों का उपयोग कम करना महत्वपूर्ण है।

अंत में कार्यक्रम संयोजक व IQAC निदेशक प्रो जी के धींगरा ने मुख्य वक्ता प्रो रजवार व अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत व धन्यवाद ज्ञापित किया उन्होंने कहा कि यूकास्ट द्वारा समय समय पर इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिससे छात्रों में जागरूकता बढ़ रही है I अंत में प्रतियोगिता में विजय प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को मुख्य वक्ता प्रो रजवार के हाथों द्वारा पुरस्कृत किया गया।

Previous post

देहरादून में भारी से अति भारी वर्षा का रेड अलर्ट, जिले में 18 सितंबर को सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र रहेंगे बंद

Next post

एसजीआरआरयू में विशेषज्ञों ने दिखाई पर्वतीय खेती में खुशहाली की राह, उत्तराखण्ड में औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती में अपार संभावनाएँ

Post Comment

You May Have Missed