भगवंत ग्लोबल विश्वविद्यालय में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई गुरु पूर्णिमा

भगवंत ग्लोबल विश्वविद्यालय में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई गुरु पूर्णिमा

  • दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ शुभारंभ, कुलपति और प्रतिकुलपति ने गुरु परंपरा के महत्व पर डाला प्रकाश

कोटद्वार : भाबर स्थित भगवंत ग्लोबल विश्वविद्यालय (बीजीयू) में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, सम्मान और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में गुरु परंपरा, भारतीय संस्कृति और महर्षि वेदव्यास के योगदान को याद करते हुए शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को गुरु के मार्गदर्शन का महत्व बताया गया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के. शर्मा एवं प्रतिकुलपति प्रो. पी.एस. राणा ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित एवं पुष्प अर्पित कर किया। पूरे आयोजन में श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण का विशेष माहौल देखने को मिला।

कुलपति ने कबीर के दोहे से बताया गुरु का महत्व

कुलपति प्रो. ए.के. शर्मा ने अपने संबोधन में संत कबीरदास के प्रसिद्ध दोहे के माध्यम से गुरु और गोविंद की महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरु के आदर्शों का अनुसरण कर ज्ञान और संस्कारों के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

महर्षि वेदव्यास के योगदान को किया याद

प्रतिकुलपति प्रो. पी.एस. राणा ने सभी को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए गुरु शब्द के वास्तविक अर्थ और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास का भावपूर्ण स्मरण करते हुए उनके ज्ञान, साहित्य और भारतीय संस्कृति में योगदान को रेखांकित किया।

शिक्षकों एवं कर्मचारियों की रही सहभागिता

कार्यक्रम का संचालन समन्वयक ज्योति नेगी ने किया। इस अवसर पर अरुण कुमार, डॉ. अभिषेक शर्मा, शिवानी, श्वेता, पंकज, राहुल, विकास, शैलेश, कमल, हिमांशु, रोहित, सुमन, पिंकी, साक्षी, कुसुम सहित विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय प्रबंधन ने दी शुभकामनाएं

विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. अनिल सिंह, चेयरपर्सन डॉ. आशा सिंह तथा डॉ. विभांशु विक्रम सिंह ने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए गुरु परंपरा के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया।

 

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