ग्रामोत्थान परियोजना बनी ग्रामीण महिलाओं की आजीविका का आधार, दुग्ध उत्पादन और विपणन से महिलाओं को घर बैठे बेहतर आय

ग्रामोत्थान परियोजना बनी ग्रामीण महिलाओं की आजीविका का आधार, दुग्ध उत्पादन और विपणन से महिलाओं को घर बैठे बेहतर आय

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले में ग्रामोत्थान परियोजना महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार देकर उनकी आय का बेहतर आधार बन कर सामने आ रही है। चमोली जनपद में अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी) सहायतित  ग्रामोत्थान परियोजना की ओर से संचालित सामुहिक आजीविका सुदृढ़ीकरण योजना ग्रामीण महिलाओं की आय का बेहतर आधार बनने लगी है। योजना के तहत चमोली में विभिन्न उद्यमों के साथ ही दुग्ध उत्पान और विपणन की व्यवस्था भी तैयार की जा रही है। इससे जनपद में पशुपालकों की आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

दशोली विकाखंड में परियोजाना की ओर से समुदाय आधारित उद्यम/व्यक्तिगत उद्यम के तहत हरियाली कलस्टर लेवर फैडरेशन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और विपणन का कार्य कर रही है। इसके तहत फैडरेशन से सबंद्ध 57 महिला स्वयं सहायता समूहों की 59 महिलाएं दुग्ध उत्पादन कर रही हैं। इसके लिए क्लस्टर की ओर से गोपेश्वर में आउटलेट स्थापित किया गया है। जहां से प्रतिदिन 120 लीटर दूध का विपणन किया जा रहा है। इससे क्लस्टर प्रतिमाह एक लाख 65 हजार से अधिक की आय अर्जित कर रहा है। इसके अलावा क्लस्टर की ओर से दुग्ध से बने उत्पाद दही, छांछ, पनीर और अन्य उत्पादों का भी विपणन किया जा रहा है। दुध उत्पादन करने वाली महिलाओं को अपने उत्पादों को बेचने के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ रही है और उन्हें घर पर ही बेहतर आय प्राप्त हो रही है।

  • कौंज पोथनी गांव निवासी ममता देवी का कहना है कि पूर्व में उन्हें अपने दूध के विपणन के लिए स्वयं बाजार तक जाना पड़ रहा था। इसमें अधिक समय जाया होने से उन्हें घर के कामों के लिए समय नहीं मिलता था। दर निर्धारित न होने से आय भी नियमित नहीं हो पा रही थी, लेकिन ग्रामोत्थान परियोजना की ओर से तैयार विपणन की व्यवस्था से समय की बचत के साथ ही बेहतर आय प्राप्त हो रही है।
  • रौली ग्वाड़ गांव निवासी नीलम देवी का कहना है कि ग्रामोत्थान परियोजना की ओर से गठित महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपने दूध के विपणन में सुगमता हुई है। जहां क्लस्टर के स्वयं सेवक घर पर आकर दूध क्रय कर लेते हैं और नियमित तौर पर मासिक आय मिल रही है। इससे आजीविका में सुधार हुआ है।

बोले अधिकारी

जिले परियोजना की ओर से पांच समुदाय आधारित उद्यम के माध्यम से 82 महिला स्वयं सहायता समूहों 410 महिलाओं को जोड़ा गया है। इनके माध्यम से आउटलेट संचालन, दुग्ध उत्पान, रेस्टोरेंट जैसे उद्यमों का संचालन किया जा रहा है। इनके माध्यम से बीते वर्ष जनपद के महिला स्वयं सहायता समूहों ने एक करोड़ 39 लाख की आय अर्जित की है। वर्तमान 26 नए उद्यमों की स्थापना की प्रक्रिया गतिमान है।

शशिकांत यादव, जिला परियोजना प्रबंधक, ग्रामोत्थान, चमोली।

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