भगवती कालिंका मैदयुल धार देवी रथ यात्रा पोखनी पहुँची

भगवती कालिंका मैदयुल धार देवी रथ यात्रा पोखनी पहुँची

ज्योतिर्मठ। भगवती कालिंका मैदयुल धार देवी की पावन रथ यात्रा अनसूया आश्रम से वापसी के बाद दशोली विकासखंड होते हुए ज्योतिरमठ विकासखंड के पोखनी गांव पहुंची। लगभग 10 किलोमीटर के कठिन पैदल मार्ग को तय कर यात्रा जब गांव पहुंची तो महिला-पुरुषों ने फूल-मालाओं और श्रद्धा के जयघोष के साथ देवी का भव्य स्वागत किया।

पौराणिक परंपरा का जीवंत स्वरूप

यह रथ यात्रा पूरी तरह पैदल मार्ग से संचालित होती है और मार्ग में आने वाले देवस्थानों तथा पौराणिक स्थलों में भगवती के दर्शन कराए जाते हैं। मान्यता है कि देवी उन्हीं स्थानों पर पहुंचती हैं, जहां प्राचीन काल में देवी-देवताओं के मेले आयोजित हुआ करते थे।

ऐसे दर्जनों गांव हैं, जहां देवी-देवताओं की रथ यात्राएं निकलती हैं और भगवती कालिंका मैदयुल धार देवी वहां परिक्रमा करती हैं।

इन गांवों से होकर पहुंची यात्रा

अनसूया आश्रम से लौटकर रथ यात्रा मंडल घाटी होते हुए देवलधार, गवाड़, सगर, गंगोल गांव, गोपेश्वर, हल्द पानी, चमोली, पीपलकोठी, पाखी, मठ, झडेता, वेमरु और स्यूंण गांवों से गुजरते हुए पोखनी गांव पहुंची।

देवस्थानों के दर्शन और पारिवारिक मिलन

पोखनी पहुंचने पर भगवती ने विभिन्न देवस्थानों में दर्शन कर पंचायती भत्ता ग्रहण किया। इसके बाद देवी अपने भाई जाख राजा से मिलीं, जिसे स्थानीय लोग आस्था और परंपरा से जोड़कर देखते हैं।

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