मलेशिया में उत्तराखण्ड का परचम, काया ध्यानी ने कॉमनवेल्थ चेस में जीता सिल्वर

मलेशिया में उत्तराखण्ड का परचम, काया ध्यानी ने कॉमनवेल्थ चेस में जीता सिल्वर

देहरादून : उत्तराखण्ड की होनहार युवा शतरंज खिलाड़ी काया ध्यानी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए रजत पदक जीता है। मलेशिया में 4 से 12 अक्टूबर तक आयोजित पहले कॉमनवेल्थ स्कूल चेस टूर्नामेंट 2026 में काया ने अंडर-11 गर्ल्स रैपिड चेस श्रेणी में सिल्वर मेडल हासिल किया। महज 11 साल की उम्र में मिली इस उपलब्धि से देहरादून सहित पूरे उत्तराखण्ड में खुशी का माहौल है।

देहरादून के सीजेएम स्कूल में पढ़ने वाली काया ने 5 अक्टूबर को रैपिड चेस के मुकाबले संपन्न होने के बाद यह पदक अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में कॉमनवेल्थ देशों के स्कूली खिलाड़ी विभिन्न आयु वर्गों में हिस्सा ले रहे हैं। काया ने अपनी शानदार खेल प्रतिभा के दम पर अंडर-11 गर्ल्स वर्ग में जगह बनाई और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का मान बढ़ाया।

काया की इस सफलता की खास बात यह है कि वह पढ़ाई और शतरंज दोनों में बेहतर प्रदर्शन के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। कम उम्र में खेल और शिक्षा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतना उनके शतरंज करियर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी इस सफलता से परिवार और स्कूल में भी उत्साह है।

अब क्लासिकल चेस में दिखाएंगी दम

रैपिड चेस में पदक जीतने के बाद काया की अगली चुनौती क्लासिकल चेस चैंपियनशिप है। टूर्नामेंट में क्लासिकल मुकाबलों की शुरुआत 6 अक्टूबर से हो रही है, जिसमें वह एक बार फिर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। रैपिड चेस की तुलना में क्लासिकल प्रारूप में खिलाड़ियों को अधिक समय मिलता है। इसमें गहरी रणनीति, धैर्य और सोच-समझकर चाल चलना अहम होता है।

काया के पिता पंकज ध्यानी के अनुसार, रैपिड चेस में सिल्वर मेडल जीतने के बाद काया का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब उनकी कोशिश क्लासिकल चेस में भी अच्छा प्रदर्शन करने की होगी।

काया ध्यानी की यह उपलब्धि उत्तराखण्ड की युवा खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा है। 11 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। अब सभी की नजरें क्लासिकल चेस में उनके प्रदर्शन पर टिकी हैं।

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