फर्जी दस्तावेजों से MBBS दाखिले का मामला : दो और गिरफ्तार, 12 सीटों का आवंटन रद्द
देहरादून। उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर MBBS में दाखिले के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले की नई परतें सामने आ रही हैं। पुलिस ने इस प्रकरण में दो और आरोपितों संजय कुमार और गिरीश सिंह को गिरफ्तार किया है। दोनों की गिरफ्तारी देहरादून से ही की गई है। इसके साथ ही इस मामले में देहरादून से गिरफ्तार आरोपितों की संख्या पांच हो गई है, जबकि पूरे प्रकरण में अब तक 12 लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है।
पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि संजय कुमार और गिरीश सिंह पर तीन अभ्यर्थियों के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का आरोप है। इनमें कुमारी परी, खुशी और स्वाति के नाम शामिल हैं। आरोप है कि इन अभ्यर्थियों के लिए फर्जी आधार कार्ड, मूल निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार किए गए तथा इसके बदले मोटी रकम ली गई। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपितों का आपस में परिचय वर्ष 2007 से बताया जा रहा है।
अब तक 12 MBBS सीटों का आवंटन रद्द
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिले की जांच के बाद अब तक 12 MBBS सीटों का आवंटन रद्द किया जा चुका है। रद्द किए गए आवंटनों में शामिल नाम हैं –
- अनुराग भोजवाल – हल्द्वानी
- दीक्षा कुमारी – श्रीनगर
- अलसामी काजल – हल्द्वानी
- चित्रा – हरिद्वार
- प्रियांशु गुप्ता – अल्मोड़ा
- वैष्णवी सिंह – श्रीनगर
- प्रभात चौधरी – हल्द्वानी
- अवंतिका डबास – श्रीनगर
- वैनवी कुमारी – हल्द्वानी
- दक्ष चतुर्वेदी – हरिद्वार
- काजल भारद्वाज – दून मेडिकल कॉलेज
- दीपांशु – दून मेडिकल कॉलेज
जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और इनके आधार पर दाखिला दिलाने का नेटवर्क कितना व्यापक है। मामले में करीब 40 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
तीसरे चरण की काउंसलिंग आज से
इसी बीच MBBS प्रवेश के लिए तीसरे चरण की काउंसलिंग आज से शुरू हो रही है। इसकी सूचना संबंधित वेबसाइट पर जारी कर दी गई है। फर्जी दस्तावेजों के मामले सामने आने के बाद इस चरण की काउंसलिंग में दस्तावेज सत्यापन को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
परीक्षा नियंत्रक विजय जुयाल ने कहा है कि दस्तावेज सत्यापन के दौरान जिन भी अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए जाएंगे, उनका आवेदन निरस्त माना जाएगा। ऐसे में तीसरे चरण की काउंसलिंग के दौरान भी संदिग्ध दस्तावेजों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फर्जी MBBS दाखिला प्रकरण में लगातार हो रही गिरफ्तारियों और सीटों के निरस्तीकरण से साफ है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पुलिस अब फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाले लोगों, अभ्यर्थियों और कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
Post Comment