उत्तराखण्ड : बहादुर बेटी ने जान पर खेलकर बचाई दो सहेलियों की जान, होगी सम्मानित

उत्तराखण्ड : बहादुर बेटी ने जान पर खेलकर बचाई दो सहेलियों की जान, होगी सम्मानित

देहरादून : उत्तराखण्ड के चंपावत जिले की रहने वाली 17 वर्षीय माया कांडपाल ने अपने अदम्य साहस और बहादुरी से पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। अपनी दो सहेलियों को नदी के तेज बहाव में डूबने से बचाने वाली माया को वर्ष 2026 के मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 6 नवंबर को देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित करेंगे।
 
माया कांडपाल ने अगस्त 2025 में अपनी जान की परवाह किए बिना जो साहस दिखाया था, वह आज दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन गया है। उनकी बहादुरी के साथ-साथ पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन ने भी उन्हें खास पहचान दिलाई है।
 
सहेलियों को नदी में बहता देख माया ने लगा दी छलांग
चंपावत विकासखंड के घुरचुम गांव निवासी माया कांडपाल के साथ यह घटना 5 अगस्त 2025 को हुई थी। उस समय क्षेत्र में भारी बारिश हो रही थी, जिसके चलते कई सड़कों पर भूस्खलन के कारण आवागमन बाधित था। इसके बावजूद माया अपनी सहेलियों के साथ परीक्षा देने स्कूल जा रही थीं।
 
इसी दौरान रास्ते में नदी पार करते समय तेज पानी के बहाव में उनकी दो सहेलियां कोमल और आरती बहने लगीं। दोनों को मुश्किल में देखकर माया ने एक पल की भी देरी नहीं की और अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी में छलांग लगा दी।
 
काफी मशक्कत के बाद माया ने दोनों सहेलियों को सुरक्षित नदी से बाहर निकाल लिया। इस दौरान उन्हें खुद भी चोटें आईं और तेज बहाव में उनकी चप्पलें तक बह गईं। हालांकि, अपनी सहेलियों की जान बचाने के बाद भी माया का हौसला कम नहीं हुआ।
 
सहेलियों को बचाने के बाद देने पहुंचीं परीक्षा
माया के साहस की सबसे खास बात यह रही कि दो छात्राओं की जान बचाने के बाद वह स्कूल पहुंचीं और अपनी परीक्षा भी दी। विपरीत परिस्थितियों में उनकी सूझबूझ, हिम्मत और जिम्मेदारी की भावना की जमकर सराहना हुई।
 
माया ने जिस तरह अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना दूसरों की जिंदगी बचाई, उसने साबित कर दिया कि साहस उम्र का मोहताज नहीं होता।
 
पढ़ाई में भी माया ने हासिल किए 86.6 प्रतिशत अंक
माया कांडपाल ने केवल बहादुरी के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। उन्होंने वर्ष 2026 में इंटरमीडिएट की परीक्षा 86.6 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की है।
 
उनके साहसिक कार्य और उपलब्धियों को देखते हुए जिला स्तरीय चयन समिति ने उनके नाम की संस्तुति की। इसके बाद महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से उन्हें मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार के लिए चयनित किया गया।

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