श्रम कार्ड के लिए दर-दर भटक रहे श्रमिक, व्यवस्था पर फूटा गुस्सा

श्रम कार्ड के लिए दर-दर भटक रहे श्रमिक, व्यवस्था पर फूटा गुस्सा

गोपेश्वर (चमोली)। श्रम कार्ड बनवाने के लिए ग्रामीणों को बार-बार जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मंगलवार को कार्ड बनाने के निर्धारित स्थान पर ताला लटका मिलने के बाद श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज लोगों ने जुलूस निकालकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच प्रदर्शन किया और श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि श्रम कार्ड बनाने के नाम पर सुबह से सैकड़ों लोगों को लाइन में खड़ा किया जा रहा है, लेकिन विभाग की ओर से महज 30 से 40 लोगों को टोकन देकर बाकी लोगों को लौटा दिया जाता है। दूरदराज से आने वाले ग्रामीण कई-कई दिन तक गोपेश्वर में रुकने को मजबूर हैं, इसके बावजूद कार्ड बन पाएगा या नहीं, इसकी कोई निश्चितता नहीं रहती।

नगर पालिका पार्षद सूर्य प्रकाश पुरोहित, दीपक बिष्ट और श्रमिक कृष्णा देवी ने कहा कि देवाल, थराली, गैरसैंण और पोखरी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से श्रमिकों को केवल कार्ड बनवाने के लिए गोपेश्वर बुलाना अव्यावहारिक है। गरीब श्रमिकों को आने-जाने के खर्च के साथ होटल में रहने का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। यही नहीं श्रम कार्ड बनाने के लिए भी अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। सोमवार को भी विभागीय कार्यशैली की पोल तब खुली जब विभाग की ओर से श्रमिकों को किट दिए जाने के लिए गोपेश्वर बुलाया गया। व्यवस्था न होने के चलते लोग किट लेने के लिए भटकते रहे।

प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब जिले के हर ब्लॉक और न्याय पंचायत क्षेत्र में श्रमिक रहते हैं तो श्रम कार्ड बनाने की पूरी व्यवस्था जिला मुख्यालय तक सीमित क्यों रखी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग की मौजूदा व्यवस्था श्रमिकों की सुविधा के बजाय उनकी परेशानी बढ़ा रही है।

ग्रामीणों ने मांग की कि श्रम कार्ड बनाने के लिए ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर पर नियमित शिविर लगाए जाएं, पर्याप्त टोकन दिए जाएं और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए। साथ ही कार्ड बनाने की व्यवस्था और निर्धारित दिनों की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं किया गया तो श्रमिक संगठन और ग्रामीण आंदोलन को और व्यापक करने के लिए मजबूर होंगे।

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