माल्टा, आंवला और बुरांश बने अनिता की आत्मनिर्भरता का आधार; पूर्णकिला गांव में माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट से शुरू किया स्वरोजगार, स्थानीय फलों के प्रसंस्करण से हर माह करीब 15 हजार की आमदनी

माल्टा, आंवला और बुरांश बने अनिता की आत्मनिर्भरता का आधार; पूर्णकिला गांव में माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट से शुरू किया स्वरोजगार, स्थानीय फलों के प्रसंस्करण से हर माह करीब 15 हजार की आमदनी

  • माल्टा, आंवला और बुरांश से तैयार कर रहीं जूस-जैम-अचार
  • गांव में ही कमा रहीं 15 हजार रुपये महीना

गोपेश्वर (चमोली)। पहाड़ में बिखरी माल्टा, आंवला और बुरांश की दौलत को अनिता देवी ने अपनी कमाई का जरिया बना लिया। नंदानगर विकासखंड के पूर्णकिला गांव की अनिता ने माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर स्थानीय फलों का प्रसंस्करण शुरू किया। अब इन्हीं से तैयार जूस, जैम और अचार बाजार में पहुंच रहे हैं और उन्हें हर महीने करीब 15 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।

अनिता देवी गंगा महिला ग्राम संगठन के तहत प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और नंदादेवी स्वायत्त सहकारिता की सदस्य हैं। क्षेत्र में माल्टा, आंवला और बुरांश की उपलब्धता को देखते हुए उन्होंने स्थानीय उपज को सीधे बेचने के बजाय उसका मूल्यवर्धन करने का रास्ता चुना। इससे गांव की उपज को बाजार भी मिला और उनके लिए रोजगार का नया रास्ता भी खुला।

ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) के तहत व्यक्तिगत उद्यम स्थापित करने के लिए स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाता है। इसी योजना के तहत अनिता का माइक्रो फूड प्रोसेसिंग उद्यम के लिए चयन हुआ। परियोजना से मिले सहयोग और मार्गदर्शन से उन्होंने अपनी यूनिट स्थापित की और स्थानीय फलों से विभिन्न उत्पाद तैयार करने शुरू किए।

यूनिट के लिए परियोजना के तहत एक से तीन लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसमें 30 से 75 हजार रुपये तक अनुदान, 50 हजार से 1.50 लाख रुपये तक बैंक ऋण और 20 से 50 हजार रुपये तक लाभार्थी का अंश शामिल है।

अनिता की यूनिट में तैयार माल्टा, आंवला और बुरांश के उत्पादों के साथ जूस, जैम और अचार को स्थानीय बाजार में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलने के साथ ही गांव में रोजगार का अवसर भी पैदा हुआ है। अनिता ने खुद के लिए आमदनी का जरिया बनाने के साथ अन्य महिलाओं को भी काम से जोड़ना शुरू किया है।

अब अनिता अपने कारोबार को और विस्तार देने की तैयारी में हैं। उनका लक्ष्य अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ना और पहाड़ की स्थानीय उपज को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। जिस माल्टा, आंवला और बुरांश को कभी केवल पहाड़ की उपज माना जाता था, वही अब अनिता के लिए आत्मनिर्भरता की पहचान बन रहा है।

 

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