मायके से ससुराल क्षेत्र में पहुंची बधाण की नंदा डोली

मायके से ससुराल क्षेत्र में पहुंची बधाण की नंदा डोली

-सात समंदर पार इजरायल से आया टॉम बना आकर्षण का केंद्र

गोपेश्वर (चमोली)। बारह साल के लंबे इंतजार के बाद हिमालय की अधिष्ठात्री मां नंदा की बड़ी जात अब अपने चरम की ओर बढ़ रही है। जैसे-जैसे मां नंदा की देव डोलियां अपने अगले पड़ावों की ओर बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं का कारवां भी लगातार लंबा होता जा रहा है। डोलियों के पड़ावों में अब आस्था, लोकसंस्कृति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

बुधवार को मौसम ने भी बड़ी जात का साथ दिया। चैमासा के बीच सूरज के दर्शन हुए तो पहाड़ों में चटक धूप खिल उठी। भादौ की हरियाली, पहाड़ों की ढलानों पर बिखरी प्राकृतिक सुंदरता और जगह-जगह गूंज रहे नंदा के जयकारों ने माहौल को और भी दिव्य बना दिया। गांवों में लोग अपनी आराध्या के स्वागत के लिए पलक-पांवड़े बिछाए हुए हैं।

बधाण की नंदा ने किया ससुराल क्षेत्र में प्रवेश

बड़ी जात के क्रम में बुधवार को मां राजराजेश्वरी बधाण की नंदा डोली अपने मायके पक्ष के अंतिम पड़ाव को पार कर ससुराल क्षेत्र में प्रवेश कर गई। इसके साथ ही यात्रा का भावनात्मक पक्ष और गहरा हो गया है। अब आगे के पड़ावों में मां नंदा का स्वागत ससुराल पहुंची बेटी नहीं, बल्कि घर आई बहू की तरह किया जाएगा। मां नंदा की डोली जब मायके से ससुराल की ओर बढ़ी तो श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। परंपरा के अनुसार ससुराल क्षेत्र में प्रवेश के साथ ही मां नंदा के स्वागत की तैयारियां भी विशेष रूप से की जा रही हैं।

तीनों डोलियों ने तय किए अगले पड़ाव

बंड की नंदा डोली बुधवार को नौरख, पीपलकोटी, मल्ला अगथल्ला, नंदोली मंदिर, रैतोली और नरगोली गांवों से होते हुए रात्रि विश्राम के लिए कम्यार गांव पहुंची, वहीं कुरुड़-दशोली की नंदा डोली सेमा गांव से होते हुए बैराशकुंड पहुंची और वहां से आगे बढ़कर मटई ग्वाड़ गांव में रात्रि विश्राम के लिए पहुंची। बधाण की नंदा ने भी अपने मायके पक्ष के अंतिम पड़ाव को पार कर ससुराल क्षेत्र में प्रवेश किया। डोलियों के पड़ावों पर ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से मां नंदा का स्वागत किया। जगह-जगह जागरों और लोकगीतों की गूंज के बीच श्रद्धालु डोलियों के दर्शन कर आशीर्वाद ले रहे हैं।

सात समंदर पार से आया टॉम, नंदा की भक्ति ने खींचा उत्तराखंड

मां नंदा की बड़ी जात की विराटता अब उत्तराखंड की सीमाओं से निकलकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच रही है। इसका जीवंत उदाहरण इजरायल से नंदानगर पहुंचे टॉम हैं। मां नंदा की आस्था उन्हें सात समंदर पार से यहां खींच लाई। टॉम कुरुड़ से दशोली की नंदा डोली के साथ एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव तक पैदल चल रहे हैं। पहाड़ की कठिन पगडंडियों पर श्रद्धालुओं के साथ कदमताल करते हुए टॉम इस यात्रा के हर रंग को करीब से महसूस कर रहे हैं।

उनका कहना है कि उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा कि दुनिया में इतनी भव्य और दिव्य पैदल धार्मिक यात्रा भी आयोजित होती है। पहाड़ की लोकसंस्कृति, लोगों के आतिथ्य सत्कार और प्राकृतिक सुंदरता ने उन्हें बेहद प्रभावित किया है। टॉम मां नंदा की डोली के साथ होमकुंड तक जाने की इच्छा रखते हैं।

बड़ी जात को दुनिया तक पहुंचा रहे यूट्यूबर

मां नंदा की बड़ी जात में इस बार सोशल मीडिया की भी खास मौजूदगी दिखाई दे रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से दर्जनों युवा यूट्यूबर बड़ी जात का हिस्सा बनने के लिए नंदानगर पहुंच रहे हैं। दिल्ली, पंजाब, मुनस्यारी, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, हल्द्वानी, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और देहरादून समेत विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे यूट्यूबर यात्रा के हर पड़ाव को अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं।

डोलियों का स्वागत, जागर, लोकगीत, ग्रामीणों की आस्था, पहाड़ की परंपराएं और कठिन हिमालयी यात्राकृइन सभी दृश्यों को सोशल मीडिया के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाया जा रहा है। इससे बड़ी जात की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच भी मिल रहा है।

बारह साल में एक बार होने वाली मां नंदा की बड़ी जात अब केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं रह गई है। यह पहाड़ की आस्था, लोकसंस्कृति, परंपरा, प्रकृति और सामुदायिक जीवन का ऐसा विराट उत्सव बन चुकी है, जिसे देखने और महसूस करने के लिए देश ही नहीं, विदेशों से भी लोग खिंचे चले आ रहे हैं।

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