मलेशिया तक गूंजेगी उत्तराखंड की संस्कृत और रामायण परंपरा, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार ने मलेशियाई चार्ज डी अफेयर्स शरीफा एज्नीदा वफा से की मुलाकात
- सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार की मलेशियाई उच्चायोग में अहम पहल, रामायण-भाषा और साझा सांस्कृतिक विरासत पर भारत-मलेशिया मिलकर करेंगे काम
नई दिल्ली। उत्तराखंड की देवभाषा संस्कृत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने और भारत-मलेशिया के सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्तों को संस्कृत एवं रामायण की साझा विरासत से और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। उत्तराखंड शासन के सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित मलेशिया गणराज्य के उच्चायोग में चार्ज डी अफेयर्स शरीफा एज्नीदा वफा से मुलाकात कर संस्कृत, रामायण, भारतीय ज्ञान परंपरा और दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और संस्कृत संस्थानम को मलेशियाई विश्वविद्यालयों एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जोड़ने की दिशा में ठोस कार्ययोजना पर मंथन हुआ।
संस्कृत और रामायण को बनाया जाएगा भारत-मलेशिया सांस्कृतिक सेतु
बैठक में सचिव दीपक कुमार ने स्पष्ट किया कि संस्कृत और रामायण केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक संबंधों की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने मलेशिया स्थित विश्वविद्यालयों एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार और संस्कृत संस्थानम के अकादमिक एवं सांस्कृतिक सहयोग का प्रस्ताव रखा। इसके लिए उन्होंने मलेशियाई उच्चायोग के समक्ष आठ बिंदुओं वाली कार्यसूची प्रस्तुत की और दोनों देशों के संस्थानों के बीच संयुक्त रूप से कार्य आगे बढ़ाने की इच्छा जताई।
वाल्मीकि रामायण और ‘हिकायत सेरी रामा’ का होगा तुलनात्मक अध्ययन
प्रस्तावित कार्यसूची में वाल्मीकि रामायण और मलेशिया की ‘हिकायत सेरी रामा’ के तुलनात्मक अध्ययन को विशेष स्थान दिया गया है। इसके साथ दक्षिण-पूर्व एशिया में रामायण की परंपरा को भारत-मलेशिया की साझा विरासत के रूप में अध्ययन करने, दोनों देशों के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों एवं प्रोफेसरों के एक्सचेंज कार्यक्रम, तथा भारत-मलेशिया के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में मलेशिया की भारतीय मूल की समुदाय की भूमिका पर अध्ययन का प्रस्ताव रखा गया। यह पहल रामायण की विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं को अकादमिक स्तर पर समझने और भारत-मलेशिया के बीच सांस्कृतिक संवाद को व्यापक आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उत्तराखंड के चारधाम और संस्कृत के द्वितीय राजभाषा दर्जे से प्रभावित हुआ मलेशियाई पक्ष
सचिव दीपक कुमार ने बैठक में उत्तराखंड सरकार की ओर से देवभाषा संस्कृत और भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं संवहन के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है और राज्य सरकार संस्कृत शिक्षा को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
मलेशियाई चार्ज डी अफेयर्स शरीफा एज्नीदा वफा ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि उत्तराखंड में बदरीनाथ, केदारनाथ सहित विश्व प्रसिद्ध चारधाम स्थित हैं और संस्कृत को राज्य की द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिला हुआ है।
उत्तराखंड में होगा भारत-मलेशिया का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
बैठक में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार अथवा संस्कृत संस्थानम में मलेशिया के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। सम्मेलन में संस्कृत, रामायण, भारतीय ज्ञान परंपरा, दक्षिण-पूर्व एशिया में रामायण की सांस्कृतिक यात्रा और भारत-मलेशिया के साझा विरासत संबंधों जैसे विषयों को केंद्र में रखने की संभावना है।
मलेशियाई उच्चायोग ने प्रस्तावित विषयों को महत्वपूर्ण बताते हुए भारतीय विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। इसके साथ ही उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय को कॉन्सेप्ट नोट तैयार कर पहल को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया।
संस्कृत को वैश्विक अकादमिक मंच से जोड़ने की दिशा में कदम
बैठक में सामने आई कार्ययोजना से उत्तराखंड की संस्कृत शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक संस्थानों से जोड़ने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। विश्वविद्यालयों के बीच छात्र-प्रोफेसर आदान-प्रदान, रामायण का तुलनात्मक अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन जैसे प्रस्ताव संस्कृत को केवल पारंपरिक अध्ययन तक सीमित न रखकर वैश्विक अकादमिक एवं सांस्कृतिक विमर्श से जोड़ने की दिशा में अहम कदम हैं।
बैठक में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार का प्रतिनिधित्व प्रो. (डॉ.) अरविंद नारायण मिश्र ने किया। मलेशिया उच्चायोग की ओर से फर्स्ट सेक्रेटरी (पॉलिटिकल) अहमद रादजी मोहम्मद जिम भी मौजूद रहे।

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