हरदा Vs उमेश कुमार, 2027 के दंगल से पहले क्यों सुलग उठी पुरानी चिंगारी?
देहरादून : उत्तराखण्ड कांग्रेस में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले चल रही अंदरूनी खींचतान अब हरिद्वार की राजनीति तक पहुंच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर पार्टी हाईकमान की नाराजगी के बीच रावत के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार को लेकर नई सियासी बहस छेड़ दी है।
रावत ने बिना नाम लिए 2016 के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उस व्यक्ति पर निशाना साधा, जिसे उन्होंने अपनी सरकार गिरने का माध्यम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज हरिद्वार और आसपास के कुछ कांग्रेसी उसी व्यक्ति का महिमामंडन कर रहे हैं और उसे कांग्रेस में लाने की कोशिशें हो रही हैं। इसके बाद उमेश कुमार ने खुले पत्र के जरिये रावत पर पलटवार किया।
रावत ने बिना नाम लिए 2016 की घटना उठाई
हरीश रावत ने छह अक्तूबर को सोशल मीडिया पर लिखे पोस्ट में कहा कि 2016 में कांग्रेस सरकार गिराने में जो व्यक्ति ‘इंस्ट्रूमेंट’ बना था, आज हरिद्वार और आसपास के कुछ कांग्रेसी उसी को महत्व दे रहे हैं।
रावत का आरोप है कि लोकसभा चुनाव के दौरान भी संबंधित व्यक्ति को कांग्रेस में लाने की कोशिश हुई थी और अब यह प्रयास और आगे बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव उनकी सरकार गिरने के बाद आया।
रावत ने 2016 के घटनाक्रम को मौजूदा राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने सरकार बचाने के लिए संघर्ष किया, उसे आज खलनायक और जिस व्यक्ति के कारण कांग्रेस को लंबे समय तक सत्ता से बाहर होना पड़ा, उसे नायक बनाया जा रहा है।
उमेश कुमार बोले- मेरे नाम को ढाल बनाकर हाईकमान के सामने क्या साबित करना चाहते हैं?
रावत के पोस्ट के बाद उमेश कुमार ने सोशल मीडिया पर ‘हरीश रावत जी के नाम खुला पत्र’ जारी किया। उन्होंने सीधे रावत पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि जब वह जन निर्माण पार्टी के टिकट पर खानपुर से चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं, तो उनके कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा कहां से आ गई।
उमेश कुमार ने कहा कि उनके नाम को कांग्रेस हाईकमान के सामने एक मुद्दे के तौर पर पेश किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर एक निर्दलीय विधायक को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री को इतना लंबा राजनीतिक जवाब देने की जरूरत क्यों महसूस हुई।
‘एक निर्दलीय विधायक इतना महत्वपूर्ण कब हो गया?’
उमेश कुमार ने रावत पर तंज कसते हुए पूछा कि यदि वह एक निर्दलीय विधायक हैं और उनके पास कांग्रेस जैसा संगठन नहीं है, तो फिर उनकी राजनीति को लेकर इतनी बेचैनी क्यों है।
उन्होंने कहा कि उनके पास न राष्ट्रीय पार्टी का संगठन है और न सत्ता की मशीनरी। उनका दावा है कि उनकी राजनीतिक ताकत खानपुर की जनता के साथ उनका सीधा जुड़ाव है।
2016 के विवाद से जुड़ी रही है दोनों नेताओं की सियासी तनातनी
हरीश रावत और उमेश कुमार के बीच राजनीतिक टकराव नया नहीं है। वर्ष 2016 में उत्तराखण्ड की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान सामने आए स्टिंग ऑपरेशन ने राज्य की राजनीति को हिला दिया था। उस समय उमेश कुमार पत्रकार थे और रावत सरकार से जुड़े कथित स्टिंग को लेकर विवाद के केंद्र में आए थे। इसी घटनाक्रम के बाद रावत और उमेश कुमार के बीच राजनीतिक तल्खी लगातार बनी रही।
करीब एक दशक बाद यही मुद्दा अब एक बार फिर चर्चा में है। फर्क यह है कि इस बार विवाद केवल 2016 के घटनाक्रम तक सीमित नहीं है। इसके पीछे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां और खानपुर सीट का राजनीतिक समीकरण भी जुड़ गया है।
खानपुर सीट पर क्यों टिकी निगाहें?
उमेश कुमार ने 2022 के विधानसभा चुनाव में खानपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी। अब उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जन निर्माण पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है।
दूसरी ओर हरीश रावत भी हाल के दिनों में हरिद्वार जिले में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और खानपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच 2016 के पुराने विवाद का फिर सामने आना खानपुर की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रावत की यात्रा पर पहले से हाईकमान नाराज
उमेश कुमार को लेकर विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब हरीश रावत खुद अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर कांग्रेस हाईकमान के सवालों का सामना कर रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने रावत की यात्रा को लेकर आपत्ति जताई थी। पार्टी की ओर से कहा गया कि यात्रा की जानकारी प्रदेश संगठन और प्रभारी को नहीं थी। इसके बाद संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी स्पष्ट किया कि चुनावी अभियान पार्टी के बैनर और सामूहिक नेतृत्व में चलाया जाना चाहिए। व्यक्तिगत अभियानों को लेकर पार्टी ने असहमति जताई है।
दिल्ली में रावत से होगी बातचीत
अब रावत को पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी यात्रा और हालिया राजनीतिक गतिविधियों को लेकर अपना पक्ष रखना है। सात अक्तूबर को उनकी प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा से मुलाकात प्रस्तावित है, जबकि पार्टी संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ भी उनकी बातचीत होनी है।
इस बीच रावत ने अपनी आगे की कुछ यात्राओं को स्थगित करने की बात कही है। पार्टी नेतृत्व की आपत्ति के बाद उनकी गतिविधियों पर सबकी नजर है।
अब सबसे बड़ा सवाल- उमेश को लेकर रावत तक सूचना पहुंची कहां से?
रावत के पोस्ट के बाद कांग्रेस के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर है कि आखिर उन्हें उमेश कुमार को कांग्रेस में लाने के प्रयास की जानकारी किस स्तर से मिली।
उमेश कुमार ने अपने जवाब में इस दावे को खारिज किया है और कहा है कि उनके नाम का इस्तेमाल कांग्रेस हाईकमान के सामने किया जा रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि रावत के दावे का आधार क्या है और उन्होंने किन लोगों की गतिविधियों के आधार पर यह बात कही।
फिलहाल न रावत की ओर से इस कथित प्रयास में शामिल लोगों के नाम सार्वजनिक किए गए हैं और न ही कांग्रेस की ओर से उमेश कुमार को पार्टी में शामिल करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने आई है।
यही वजह है कि 2016 के पुराने विवाद के साथ अब 2027 का सवाल जुड़ गया है। खानपुर में राजनीतिक सक्रियता, उमेश कुमार की नई पार्टी और कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान आने वाले दिनों में इस सीट को और चर्चा में ला सकती है।

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