उत्तराखण्ड पहुंचा पहला सफेद बाघ
देहरादून: सफेद शरीर पर काली धारियां, मजबूत कद-काठी और बाघ जैसी रौबदार चाल – अब तक सफेद बाघ को तस्वीरों और वीडियो में देखने वाले उत्तराखण्ड के लोगों के लिए यह नजारा जल्द ही हकीकत बनने वाला है। ग्वालियर जूलॉजिकल पार्क का सफेद बाघ ‘तेजस’ सोमवार को देहरादून जू पहुंच गया। इसके साथ ही देहरादून जू के वन्यजीव परिवार में पहली बार सफेद बाघ की एंट्री हुई है।
यह बदलाव टाइगर एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत हुआ है। इस एक्सचेंज के तहत देहरादून जू के नर बाघ ‘भोला’ को ग्वालियर भेजा गया है, जबकि ग्वालियर से करीब तीन महीने के सफेद बाघ ‘तेजस’ को देहरादून लाया गया है। इस प्रक्रिया के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की मंजूरी भी ली गई है।
556 किलोमीटर का सफर तय कर देहरादून पहुंचा तेजस
ग्वालियर से देहरादून तक ‘तेजस’ ने सड़क मार्ग से करीब 556 किलोमीटर का सफर तय किया। रेस्क्यू वाहन के जरिए उसे करीब 12 से 13 घंटे की यात्रा के बाद देहरादून लाया गया। उसके साथ करीब 13 सदस्यों की टीम भी मौजूद रही, जिसने पूरे सफर के दौरान उसकी निगरानी की।
जू की रेंजर अधिकारी और इंचार्ज दीक्षा भट्ट के मुताबिक, सफर के दौरान ‘तेजस’ को ट्रैंक्विलाइज नहीं किया गया। लंबी यात्रा के दौरान उसे खाना भी नहीं दिया गया, ताकि सफर में भोजन के कारण किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी न हो।
अभी पर्यटकों के सामने नहीं आएगा ‘तेजस’
सफेद बाघ के देहरादून पहुंचने के बाद पर्यटकों में उसे देखने की उत्सुकता बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन इसके लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा। जू प्रशासन ‘तेजस’ को फिलहाल सीधे प्रदर्शन क्षेत्र में नहीं रखेगा।
नए स्थान पर पहुंचने के बाद उसे निगरानी में रखा जाएगा। पशु चिकित्सकों की टीम उसकी सेहत, खान-पान और व्यवहार पर नजर रखेगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वह देहरादून के वातावरण और नए बाड़े में किस तरह खुद को ढाल रहा है।
जू प्रशासन के अनुसार, सामान्य स्वास्थ्य स्थिति और नए माहौल में उसके सहज होने के बाद ही उसे पर्यटकों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। मौजूदा जानकारी के मुताबिक, आम लोगों को ‘तेजस’ का दीदार करने के लिए करीब एक महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है।
तैयार है सफेद बाघ के लिए नया बाड़ा
‘तेजस’ के स्वागत के लिए देहरादून जू में उसका बाड़ा पहले से तैयार किया जा चुका है। जू प्रशासन की ओर से संभावना जताई गई है कि वाइल्डलाइफ वीक के दौरान इसके उद्घाटन की प्रक्रिया हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।
‘भोला’ गया ग्वालियर, ‘तेजस’ ने ली जगह
टाइगर एक्सचेंज के तहत देहरादून और ग्वालियर जूलॉजिकल पार्क के बीच बाघों की अदला-बदली की गई है। देहरादून का नर बाघ ‘भोला’ अब ग्वालियर जूलॉजिकल पार्क में रहेगा, जबकि सफेद बाघ ‘तेजस’ देहरादून जू का नया आकर्षण बनेगा।
ऐसे वन्यजीव एक्सचेंज का उद्देश्य केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण बढ़ाना नहीं होता, बल्कि चिड़ियाघरों में वन्यजीव प्रबंधन और आनुवंशिक विविधता को बेहतर बनाए रखना भी इसका एक अहम हिस्सा है।
देहरादून जू में पहली बार दिखेगा सफेद बाघ
देहरादून जू में पर्यटक पहले से ही रॉयल बंगाल टाइगर समेत कई वन्यजीवों को देखने आते हैं। लेकिन सफेद बाघ का यहां आना पहली बार है। अपने अलग रंग और काली धारियों के कारण सफेद बाघ लोगों के बीच हमेशा खास आकर्षण का केंद्र रहा है।
‘तेजस’ के आने के बाद देहरादून जू की वन्यजीव विविधता में एक और खास नाम जुड़ गया है। खासकर वन्यजीव प्रेमियों और बच्चों में इसे लेकर उत्सुकता बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, अभी ‘तेजस’ को देखने के लिए जू पहुंचने वालों को थोड़ा संयम रखना होगा। स्वास्थ्य जांच और नए वातावरण में अनुकूलन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उसे आम पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। यानी देहरादून में सफेद बाघ की पहली झलक भले ही आज पहुंच गई हो, लेकिन उसका सार्वजनिक दीदार कुछ समय बाद ही हो सकेगा।
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