विराट हिन्दू सम्मेलन में लिया देश, धर्म व संस्कृति के संरक्षण का संकल्प

विराट हिन्दू सम्मेलन में लिया देश, धर्म व संस्कृति के संरक्षण का संकल्प

रूडकी : राष्ट्रीय स्वयं सेवकसंघ शताब्दी वर्ष पर देश भर में मण्डल व बस्ती स्तर पर विराट हिन्दू सम्मेलन मनाये जा रहे है। इसी क्रम में सर्व समाज द्वारा हिदू सम्मेलन तेजपुर, रुहालकी तथा हल्लू माजरा मे विराट हिन्दू सम्मेलन हंसानन्द सरस्वती की अध्यक्षता मे दिव्य भव्यता से मनाया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया ।

मुख्य वक्ता सुनील प्रान्त शरीरिक शिक्षण प्रमुख राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा कहा कि यह संघ का शताब्दी वर्ष है संघ संस्थापक डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार जन्मजात देश भक्त थे 1912 मे डाक्टरी की डिग्री प्राप्त कर अविवाहित रहकर भारत माता को स्वतन्त्र कराने तथा भविष्य मे देश गुलाम न हो इसके लिए हिन्दू समाज को संगठित करने के लिए 1925 में संघ की स्थापना की थी । उन्होंने कहा था कि भारत हिन्दू राष्ट्र है संगठन में शक्ति है शक्ति से सभी कार्य सम्भव है उन्होंने 1930 मे दस हजार लोगो के साथ जंगल सत्याग्रह किया तथा 9 माह जेल मे रहे।

संघ के योगदान को बताते हुए कहा कि 1942 के भारत छोडो आदोलन मे स्वयसेवको ने बढ चढकर हिस्सा लिया। 1947 के भारत विभाजन मे संघ ने वास्तुहारा समिति बनाकर उनके रहने ,खाने तथा पुर्नवास की व्यवस्था की गयी 1962 मे भारतीय सेना को रसद ,रक्त तथा दिल्ली की यातायात व्यवस्था स्वयं सेवको ने की थी। इससे प्रभावित होकर 1963 की गणतन्त्र परेड मे 3000 गणवेश धारी स्वयसेवको को आमन्त्रित किया गया । कन्याकुमारी स्थित श्रीपाद शीला ,राममन्दिर निर्माण, संघ के योगदान से हुआ। संघ द्वारा रामसेतू तथा अमरनाथ साइन बोर्ड के लिए संघर्ष कर सफलता प्राप्त की थी । सघं सामाजिक समरसता ,कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण सरक्षण, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्य को प्रत्येक अपने आचरण में लाने के लिए प्रयासरत है ।

अनुराधा अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य घुमन्तू समाज ने कहा कि भूमि को धारण करने वाली इतनी शक्तिशाली महिला है। महिलाओं को सयुक्त परिवार को जोडकर रखने की जिम्मेदारी है उसे भाषा भजन भोजन भ्रमण भूषा भवन अपनी संस्कृति के अनुरूप हो बच्चो को संस्कारित करने की जिम्मेदारी माँ की है।

हिन्दू धर्म की विशेषता तथा वर्तमान मे हिन्दुओ की क्रिया कलापो पर बोलते हुए स्वामी हंसानन्द सरस्वती जी महाराज मानव कल्याण आश्रम द्वारा कहा कि प्राचीन काल से ही सूर तथा असूर संघर्ष होता रहा है। हमारे देती देवता शस्त्र तथा शास्त्र दोनो धारण किये है। तथा समरसता का उदाहरण अपने आचरण से दिया । संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन पर बल दिया । कार्यक्रम मे कई सौ हिन्दूप्रेमी उपस्थित रहकर भण्डारे का प्रसाद ग्रहण किया।

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