दिवंगत लोक कलाकारों की स्मृति में गूंजा “श्रद्धा सम्मान 2026”, संस्कृति संरक्षण और संवर्धन पर हुआ मंथन, कलाकारों के परिजनों व प्रेरणादायी महिलाओं को किया जाएगा सम्मानित
देहरादून : शारदा स्वर संगम/‘आवाज सुनो पहाड़ों की’ मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘श्रद्धा सम्मान लोकपितृ स्मरण समारोह-2026’ का शुभारंभ उत्तराखंड की लोक संस्कृति और कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले दिवंगत लोक कलाकारों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुआ। यह समारोह 4 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। कार्यक्रम के प्रथम दिन प्रदेश के उन दिवंगत लोक कलाकारों को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने अपनी कला-साधना और लोक संस्कृति के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम में विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’ भी उपस्थित रहे। उन्होंने लोक संस्कृति, लोक कलाकारों और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के महत्व पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक कला, लोक संगीत एवं पारंपरिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को लेकर विभिन्न सांस्कृतिक चर्चाएं एवं संगोष्ठियां भी आयोजित की गईं। वक्ताओं ने कहा कि लोक परंपराएं उत्तराखंड की पहचान और सामाजिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रथम दिवस की अंतिम चर्चा में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। इस दौरान लोक संस्कृति, परंपराओं के संरक्षण तथा उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
‘आवाज सुनो पहाड़ों की’ मंच के निर्माण/निर्देशक नरेन्द्र रौथाण ने बताया कि समारोह के माध्यम से दिवंगत लोक कलाकारों के योगदान को स्मरण करने के साथ उनके परिवारों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
समारोह के आगामी कार्यक्रमों में दिवंगत लोक कलाकारों के परिजनों को श्रद्धा सम्मान प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही समाज की उन प्रेरणादायी महिलाओं को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपने जीवन में अपने परिवार के सदस्यों को खोने जैसे कठिन दौर का सामना करने के बावजूद हिम्मत नहीं छोड़ी और समाज के लिए प्रेरणा बनीं।
आयोजकों के अनुसार, ‘श्रद्धा सम्मान लोकपितृ स्मरण समारोह-2026’ केवल एक सम्मान कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तराखंड के उन लोक कलाकारों और समाज की प्रेरणादायी विभूतियों के प्रति सामूहिक श्रद्धांजलि और कृतज्ञता का प्रयास है, जिन्होंने अपने जीवन और कर्मों से समाज एवं संस्कृति को समृद्ध किया। समारोह 4 अक्टूबर 2026 तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, चर्चाओं और सम्मान समारोहों के साथ जारी रहेगा।


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