आरटीआई में लापरवाही पर राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुँवर ने की बड़ी कार्रवाई, तहसील विकासनगर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पर 20 हजार की शास्ति

आरटीआई में लापरवाही पर राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुँवर ने की बड़ी कार्रवाई, तहसील विकासनगर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पर 20 हजार की शास्ति

देहरादून। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना को लेकर उत्तराखण्ड सूचना आयोग के आदेश के अनुपालन में देरी का मामला सामने आया है। आयोग ने विकासनगर तहसील के लोक सूचना अधिकारी एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आरपी रयाल पर 20 हजार रुपये की शास्ति अधिरोपित की है। राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुँवर ने 7 सितंबर 2026 को पारित आदेश में संबंधित अधिकारी के स्पष्टीकरण पर विचार के बाद धारा 20(1) के तहत यह कार्रवाई की।

छह बिंदुओं पर मांगी थी सूचना

मामला मोहित कुमार अंतिवाल के 30 दिसंबर 2024 के मूल सूचना अनुरोध से जुड़ा है। इसमें छह बिंदुओं पर सूचना मांगी गई थी। सूचना उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने 28 मार्च 2025 को आयोग में द्वितीय अपील दाखिल की। आयोग ने द्वितीय अपील संख्या 43126 में 12 मार्च 2026 को आदेश जारी करते हुए लोक सूचना अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर सभी छह बिंदुओं की बिंदुवार, स्पष्ट एवं पूर्ण सूचना पंजीकृत डाक से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।

आदेश के बाद भी सूचना नहीं पहुंची

आयोग के आदेश के अनुपालन को लेकर शिकायतकर्ता ने 10 अप्रैल 2026 को फिर आयोग का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद 11 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई में आयोग ने पत्रावली का अवलोकन किया। आदेश में दर्ज किया गया कि पूर्व आदेश के तहत शिकायतकर्ता को सूचना भेजे जाने संबंधी अभिलेख उपलब्ध नहीं थे।

इस पर आयोग ने लोक सूचना अधिकारी को अंतिम अवसर देते हुए एक सप्ताह के भीतर पंजीकृत डाक से सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही धारा 20(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर अधिकतम 25 हजार रुपये तक की शास्ति और धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति के संबंध में पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया।

सूचना देने के बजाय अभिलेख देखने के लिए बुलाया

आयोग के आदेश में दर्ज है कि 11 अगस्त के निर्देश के बाद भी शिकायतकर्ता को मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बजाय 21 अगस्त 2026 को पत्र भेजकर उन्हें कार्यालय में अभिलेखों के अवलोकन के लिए आमंत्रित किया गया। 7 सितंबर को हुई सुनवाई में शिकायतकर्ता ने दूरभाष के माध्यम से इस तथ्य की पुष्टि की। आयोग ने उपलब्ध अभिलेखों और संबंधित अधिकारी के स्पष्टीकरण पर विचार करते हुए पूर्व आदेश के अनुरूप सूचना उपलब्ध कराने की कार्रवाई पूर्ण नहीं होने का निष्कर्ष दर्ज किया।

डेढ़ साल से अधिक समय बाद भी सूचना का मामला लंबित

आयोग ने आदेश में उल्लेख किया कि मूल अनुरोध पत्र के बाद लगभग एक वर्ष आठ माह की अवधि बीतने के बावजूद शिकायतकर्ता को मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसी आधार पर आरपी रयाल का स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं किया गया और पहले जारी कारण बताओ नोटिस की पुष्टि करते हुए 20 हजार रुपये की शास्ति अधिरोपित की गई।

शास्ति वसूली के निर्देश

आयोग ने शास्ति की राशि ई-चालान के माध्यम से जमा कराने तथा उत्तराखण्ड सूचना का अधिकार नियमावली, 2013 के नियम 11 के तहत संबंधित लोक प्राधिकारी को राशि की वसूली कर आयोग को सूचित करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य सूचना आयोग ने आदेश की प्रति सचिव, उत्तराखण्ड सूचना आयोग और जिलाधिकारी देहरादून को भेजने के निर्देश देते हुए शिकायत का निस्तारण कर पत्रावली दाखिल दफ्तर करने के आदेश दिए हैं।

Previous post

आरटीआई में लापरवाही पर राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुँवर ने की बड़ी कार्रवाई, तहसीलदार ऋषिकेश पर 10 हजार और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पर 5 हजार की शास्ति

Next post

पौड़ी में रिक्त ग्राम पंचायत पदों पर उप निर्वाचन की प्रक्रिया शुरू

Post Comment

You May Have Missed