बैंक खाते किराए पर देने वालों पर भी होगी सख्त कार्रवाई – STF
देहरादून : उत्तराखण्ड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा साइबर अपराधियों के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक और बड़ी विधिक कार्रवाई की गई है। देश भर में चल रहे डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम की अवैध रकम को विभिन्न बैंक खातों में मँगवाकर उसकी लेयरिंग (Layering) करने वाले एक संगठित गिरोह के 03 सदस्यों के विरुद्ध थाना साइबर क्राइम, देहरादून में मुकदमा (FIR No. 32/2026) दर्ज किया गया है।
एसटीएफ की साइबर टीम अब ऐसे सभी डिजिटल, गूगल और बैंक अकाउंट्स पर कड़ी तकनीकी व डिजिटल निगरानी रख रही है, जो चंद रुपयों या कमीशन के लालच में साइबर ठगों के मददगार बन रहे हैं।
एसटीएफ की जांच में हुआ खुलासा: कैसे काम कर रहा था यह सिंडिकेट?
म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) का जाल: जांच में सामने आया है कि कुछ लोग मामूली कमीशन या पैसों के लालच में आकर अपने बैंक खाते, इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, ATM कार्ड और सिम कार्ड इन अपराधियों को इस्तेमाल के लिए दे रहे थे।
मल्टी-लेयरिंग (Multi-layer Transactions): पुलिस और कानून को धोखा देने के लिए आरोपी इस ठगी की रकम को तुरंत कई अलग-अलग बैंक खातों, ATM निकासी और POS ट्रांजेक्शन के जरिए ट्रांसफर कर देते थे, ताकि मनी ट्रेल (धन के स्रोत) को उलझाया जा सके।
एसटीएफ उत्तराखण्ड द्वारा जारी आधिकारिक एडवाइजरी: 10 कड़े निर्देश
1-कमीशन का लालच पड़ेगा भारी: थोड़े से कमीशन या पैसों के लालच में आकर किसी भी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक अकाउंट बिल्कुल न खुलवाएं।
2- खाता किराए पर देना गंभीर अपराध: कभी भी किसी अनजान, अनधिकृत या बाहरी व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल (किराए) के लिए न दें।
3- क्रेडेंशियल्स रखें पूरी तरह गोपनीय: अपनी इंटरनेट बैंकिंग का यूजरनेम, पासवर्ड, यूपीआई पिन या गूगल अकाउंट क्रेडेंशियल्स किसी के साथ भी साझा न करें।
4- सिम कार्ड का दुरुपयोग रोकें: अपने नाम पर रजिस्टर्ड सिम कार्ड कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने या बेचने के लिए न दें।
5-बैंकिंग किट्स को रखें सुरक्षित: अपने बैंक की चेकबुक, पासबुक और ATM कार्ड हमेशा अपने पास सुरक्षित रखें, इन्हें किसी और को सौंपना कानूनन गलत है।
6-अज्ञात ट्रांजेक्शन पर तुरंत नजर: यदि आपके खाते में अचानक कोई अज्ञात या संदिग्ध बड़ी रकम ट्रांसफर होती है, तो तुरंत अपने बैंक और पुलिस को सूचित करें।
7-हर डिजिटल फुटप्रिंट ट्रैक हो रहा है: याद रखें, डिजिटल दुनिया में किया गया हर एक ट्रांजेक्शन ट्रैक होता है। एसटीएफ की साइबर टीम गहन वित्तीय विश्लेषण (Financial Analysis) के जरिए हर संदिग्ध खाते की निगरानी कर रही है।
8-अपराधियों के सीधे हिस्सेदार: साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते या संसाधन (Resources) उपलब्ध कराना आपको कानूनी रूप से उनका हिस्सेदार (Co-accused) बना देता है।
9-कठोर कानूनी कार्रवाई तय: म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी उतनी ही कठोर कानूनी कार्रवाई (गिरफ्तारी व मुकदमा) की जा रही है, जितनी वास्तविक अपराधियों पर।
10-सजग रहें, सुरक्षित रहें: आपकी एक छोटी सी लापरवाही या चंद रुपयों का लालच आपको साइबर अपराधियों का मददगार साबित कर जेल पहुँचा सकता है।
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